कोरोना संकट के बीच ऐसे कुछ लोग जो फरिश्ता बनकर आए लोगों के लिए

जैसा कि आप सब जानते है इन दिनों कोरोना ने बहुत ही भयानक रूप ले लिया है, अस्पतालों में जरूरी सुविधाओं कि किल्लत ने डाॅक्टर्स और प्रशासन की कमर तोड दी है। जगह जगह से भयावह तस्वीरें या बातें सुनने को मिल रही है। लोग अपने परिजनों को लेकर इधर-उधर अस्पतालों के चक्कर लगा रहे है।


लेकिन इसी सब के बीच कुछ ऐसे लोग भी है जो फरिश्ता बनकर निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद कर रहें है जिन्हें की आप ऐसे संकट की घडी में रियल लाईफ हीरोज भी बोल सकते है। बिना जाने पहचाने सोशल मीडिया के माध्यम से अनजान लोगों की मदद के लिए सामने आ रहे है और दिन रात जनमानस के सेवा में तत्पर है। आईयें जानते हैं ऐसे ही कुछ हीरोेज के बारे मे


लखनऊ के हिमांशु बाजपेयी






लखनऊ के प्रसिद्ध लेखकों और स्टोरीटेलर हिमांशु बाजपेयी जी इन दिनो निस्वार्थ भाव से लोगों के सेवा में दिन रात लगें हुए है। 


दूसरों की परेशानी को अपनी परेशानी समझ कर दिन रात सोशल मीडिया के माध्यम से मदद कर रहे है। और इसी के ही साथ लखनऊ और आस पास के क्षेत्र से न जाने कितने ही मरीजों को आॅक्सीजन, बेड और जिस भी तरह की मदद कर पा रहे है कर रहे है। ऐसे लोगों को दिल से सलाम।


वाराणसी के श्रेयांस त्रिपाठी


वाराणसी के रहने वाले श्रेयांश त्रिपाठी जो कि एक लेखक और पत्रकार है जोकि इन दिनों कुछ लोगों के लिए किसी फरिश्तें से कम नही है। अस्पतालों में अंजान लोगों के लिए बेड तलाशना, आॅक्सीजन की आपुर्ति करवाना या जरूरी इंजेक्शन और दवाईयां मुहैया करवाना इनकी टीम इन दिनों निस्वार्थ भाव से जनमानस के सेवा में लगे हुए है। आज के युग में जंहा अपने ही सबसे पहले साथ छोड देते है। ऐसे हीरोज का आगे आना और अंजान लोग जिनसे कोई वास्ता नही उनका दुख दर्द अपना समझ कर उनकी मदद करना अपने आप में ही एक अजीब किस्सा सा सुनाई लगता है। हम श्रेयांस त्रिपाठी और उनके जैसे तमाम लोगों को दिल से धन्यवाद और सलाम करते है।

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