कोरोना संकट और पुलिस की उभरती छवि (Corona crisis and emerging image of police)

पूरी दुनिया इस समय कोरोना महामारी से जूझ रही है और इस समय दुनिया का प्रत्येक देश इस वायरस से लडऩे के लिए केवल एक विकल्प अपना रहा है वो है लॉकडाऊन। इसी दिशा में भी भारत ने सराहनीय कदम उठाते हुए सम्पूर्ण देश में लॉकडाऊन लगाया हुआ है। प्रत्येक व्यक्ति को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस लॉकडाऊन को सफल बनाने में सरकार का साथ दे। इसके साथ-साथ प्रशासन का भी पूर्ण समर्पण चाहिए। भारत में इस लॉकडाऊन को सफल बनाने में पुलिस ने जो सहयोग दिया है, वह काबिले तारीफ है। 

पूरे देश में चाहे वहां सरकार पक्ष की हो या विपक्ष की, लेकिन पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों से लेकर नीचे स्तर के कर्मचारियों तक सभी ने लॉकडाऊन को सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग दे रहे हैं। सवा सौ करोड़ की जनसंख्या को काबू करने में पुलिस बल को दिन-रात मेहनत करनी पड़ रही है, जिसे वे बखूबी निभा भी रहे हैं। जिस प्रकार हमारे देश में फिल्मों में या आम लोगों में यह भावना पैदा है कि पुलिस को देखकर लोग उनसे कतराते हैं और उनसे बात करने से भी घबराते हैं, लेकिन इस संकटकाल में पुलिस विभाग ने यह साबित कर दिया है कि वह भी देश के लिए उतने ही अहम व महत्वपूर्ण है, जितने भारतीय सीमाओं पर खड़े हमारे फौजी। 

लॉकडाऊन के दौरान जिस प्रकार पुलिस वालों पर हिंसक घटनाएं हुई, बहुत ही हैरान करने वाली रहीं। पंजाब में हुई हाथ काटने की घटना या यूपी-बिहार आदि प्रदेशों में पुलिस वालों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटना या एक महिला पुलिस कर्मी द्वारा अपने दो-ढाई साल के बच्चे को गोद में उठाकर अपनी ड्यूटी करना, यह साबित करता है कि किस प्रकार पुलिसकर्मी पूरी लग्न से अपनी ड्यूटी को निभा रहे हैं। इतनी हिंसक घटनाओं को बावजूद भी वह अपने काम में कोई कोताही नहीं कर रहे, जिसका पता इस बात से भी लगाया जा सकता है कि ड्यूटी के दौरान कई पुलिस कर्मी भी कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, फिर भी बहुत से जाहिल लोग ऐसे हैं, जो पुलिस के इतने समझाने के बावजूद भी नियमों को मानने को तैयार नहीं हैं। 
 
पुलिस वालों के साथ-साथ सराहना हमारे प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व सरकार के आला अधिकारियों की भी करनी होगी, जो अपने कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए उनसे फोन पर बात कर उनका कुशल मंगल पूछते हैं, जिससे उन्हे यह हौंसला मिलता हैं उसमें हम अकेले नहीं हैं, पूरा देश हमारे साथ है। जनता को भी समझ में आने लगा है कि इस संकट की घड़ी में पुलिस और डॉक्टर ही वो फरिश्ते हैं, जो हमें इस संकट से बचा सकते हैं। इसी के परिणाम स्वरूप पुलिसवालों व डाक्टरों का जगह-जगह फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। वहीं पुलिस कर्मचारी भी केवल ड्यूटी न करके जहां कहीं भी संभव होता है प्रत्येक गरीब वर्ग को पैसे या खाने से हर संभव सहायता उपलब्ध करवाते हैं, जो प्रतिदिन सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है। लॉकडाऊन तोडऩे वालों को कई बार प्यार से या कई बार हल्का बल प्रयोग करके समझाते हुए देखा जा सकता है। 
    
कोरोना संकट ने देश के नागरिकों को यह समझाया है कि फौज के साथ-साथ हमारा पुलिस बल भी देश को संकट से बचाने में अहम रोल अदा करता है। जिस प्रकार हमारी फौज बाहरी ताकतों से हमारी रक्षा करती है, उसी प्रकार हमारी पुलिस भी देश के अंदर पैदा होने वाले संकटों से देश को बचाने के लिए बड़ा महत्वपूर्ण है। कोरोना काल में पुलिस की छवि उभरी है।
सन्दीप राजौरा

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