बंगाल का काला पहाड़ का रहस्य और इस्लामीकरण से इसका वास्ता


बांग्लादेश! यह नाम सुनते ही भारत के पूर्व में एक बड़े भूखंड का स्मरण हो आता है, जो कभी हमारे देश का ही भाग था। जहाँ कभी बंकिम का ओजस्वी आनंद मठ, कभी टैगोर की कविताएँ, कभी अरविन्द का दर्शन, कभी वीर सुभाष की क्रांति प्रज्वलित होती थी। आज बंगाल प्रदेश एक मुस्लिम राष्ट्र के नाम से प्रसिद्ध है, जहाँ हिन्दुओं की दशा दूसरे दर्जे के नागरिकों के समान है। क्या बंगाल के हालात सदा से ऐसे ही थे? बिल्कुल नहीं। अखंड भारतवर्ष की इस धरती पर पहले आर्य सभ्यता विराजमान थी। कुछ ऐतिहासिक भूलों ने इस प्रदेश को हमसे सदा के लिए दूर कर दिया।
एक ऐसी ही भूल कालापहाड़ का इतिहास है। बंगाल के इतिहास में काला पहाड़ एक अत्याचारी के रूप में स्मरण किया जाता है। काला पहाड़ का असली नाम कालाचंद राय था। कालाचंद राय एक बंगाली ब्राह्मण युवक था। पूर्वी बंगाल के उस वक्त के मुस्लिम शासक की बेटी को उससे प्यार हो गया। बादशाह की बेटी ने उससे शादी की इच्छा जाहिर की। वह उससे इस कदर प्यार करती थी कि वह इस्लाम छोड़कर हिंदू विधि से उससे शादी करने के लिए तैयार हो गई। रूढ़िवादी ब्राह्मणों को जब पता चला कि कालाचंद राय एक मुस्लिम राजकुमारी से शादी कर उसे हिंदू बनाना चाहता है तो ब्राह्मण समाज ने कालाचंद का विरोध किया। उन्होंने उस मुस्लिम युवती के हिंदू धर्म में आने का न केवल विरोध किया, बल्कि कालाचंद राय को भी जाति बहिष्कार की धमकी दी। कालाचंद राय को अपमानित किया गया। अपने अपमान से क्षुब्ध होकर कालाचंद ने इस्लाम स्वीकारते हुए उस युवती से निकाह कर लिया और उसके पिता के सिंहासन का उत्तराधिकारी हो गया। अपने अपमान का बदला लेते हुए राजा बनने से पूर्व ही उसने तलवार के बल पर ब्राह्मणों को मुसलमान बनाना शुरू किया। उसका एक ही नारा था- मुसलमान बनो या मरो। पूरे पूर्वी बंगाल में उसने इतना कत्लेआम मचाया कि लोग तलवार के डर से मुसलमान होते चले गए। इतिहास इस बात का साक्षी है कि पूरे पूर्वी बंगाल को इस अकेले व्यक्ति ने तलवार के बल पर इस्लाम में धर्मांतरित कर दिया। यह केवल उन मूर्ख, जातिवादी, अहंकारी व हठधर्मी रूढ़िवादी लोगों को सबक सिखाने के उद्देश्य से किया गया था। उसकी निर्दयता के कारण इतिहास उसे काला पहाड़ के नाम से जानता है। अगर अपनी संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर कुछ हठधर्मी ब्राह्मणों ने कालाचंद राय का अपमान न किया होता और अन्य मतों के लोगों के लिये स्वधर्म में आने के दरवाजे बंद न किये होते तो आज बंगाल का इतिहास कुछ और ही होता।
बंगाल का काला पहाड़ का रहस्य और इस्लामीकरण से इसका वास्ता बंगाल का काला पहाड़ का रहस्य और इस्लामीकरण से इसका वास्ता Reviewed by Hindi Sahitya on 2:06 PM Rating: 5
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