लव मैरिज - Indian Sahitya Blog I Vishwa Guru Bharat I



लव मैरिज का मतलब है अपनी आजादी से शादी। जैसा नाम वैसा काम लव और मैरिज दोनों ही इग्लिंश के शब्द हैं। यूँ समझिये इग्लिंश शादी जिसमेें रीति-रिवाज व संस्कार शामिल न हों और न ही रिश्तेदार व बराती शामिल हों। अब आपको पूर्णतय समझ में आ गया होगा कि वास्तव में लव मैरिज क्या बला होती है।
कुछ व्यक्ति अपनी पत्नी को मैरिज के बाद लव करते हैं। जिसको अरेंज मैरिज का दर्जा दियाजाता है। जो मैरिज से पहले लव करते हैं उसको लव मैरिज कहते हैं।
    लव मैरिज इतना प्यारा सा शब्द लगता है। जिसमें रोमान्स भी आ जाता है और बिन फिर हम तेरे यानी दुल्हन भी मिल जाती है। फिर कौन नहीं इस आग में कूदना चाहेगा। हमने भी ठान ली थी कि सूरज पूर्व से चाहे पश्चिम से निकले हम तो जीवन में लव मैरिज ही करेंगे। मैंने बहुत लड़कियों को प्यार भरी नजर से दीदार किया अगर किसी लडक़ी ने घास नहीं डाली। फिर कई दिनों तक सोच-विचार करता रहा आखिर में बात क्या है समझ में नही आई शायद मेरी पर्सनलिटी व बात-चीत में कमी थी।
    नेटवर्किंग कम्पनी में कार्य करने का बहाना करके घर वालों से पाँच हजार रूपये माँगे घर वालों ने नेटवर्किंग कम्पनी के सपनों में डूबकर मुझे रूपये हवाले कर दिए मैंने सारे के सारे रूपए अपने ऊपर लगा दिए। सबसे पहले तो बढिय़ा काला चश्मा व नए कपडे मँहग जूते और नाई को सचत हिदायत दी मेरे बालों को अमिताभ बच्च से कुछ बढक़र स्टाईलिश बना दीजिए। अब तो सब कुछ बदला-बदला सा लग रहा था। एक भाई ने तो मुझे टोक ही दिया आज तो बड़े खूबसूरत लग रहे हो। मैंने कहा मैं तो पहले से ही ऐसा था आपने कभी मेरे को गौर से देखा ही नहीं। मन में लड्डू फूट रहे थे अब तो बात बन ही जाएगी मानो यकीन पक्का हो गया था। लड़कियों के आगे-पीछे सीना तान कर घूमने लगा और लड़कियों केे साथ वार्तालाप में भी पनी वाणी में मिठास भरी सहजता से बात करता मेरी मिठास भरी बातों के आगे चीनी का मिठास भी फीका पड़ जाए मैंने अपने आप को लगभग सौ प्रतिशत बदल लिया था एक महीना या दो महीनें...........आठ महीने बीत गए जहाँ से शुरूआत की थी आज भी वहीं पर खड़ा था जो कपडे बडे चाव से खरीदे थे वो पुराने हो गए व जूते भी घूमते-घूमते लगभग घिस गए थे। अब तो सारी की सारी आशाओं पर पानी फिरता नजर आया। कोई आशा की किरण नजर नहीें आई फिर मेरे लंगोटिये यार ने पण्डित जी को हाथ दिखाने की सलाह दे डाली फिर एक अच्छे पण्डित की तलाश शुरू हो गई जो कल्याण कर सके। बडी मशक्त के बाद पण्डित का चुनाव हुआ हम दोनो दोस्त आठ किलोमीटर साईकिल चलाकर पण्डित के दरवाजे पहुँचे पण्डित जी ने अन्दर आने को कहा हमने सारा माजरा पण्डित जी को बता दिया अब तो पण्डित ही हमें भगवान नजर आ रहा था। पण्डित जी हमें भांप गया और जल्द ही सारा मामला समझ गया। लगता था कि पण्डित बहुत ज्ञानी व अनुभवी था। थोड़ा सा धीरज बाँधा। पण्डित ने बातों ही बातों में मेरे से सब कुछ पूूछ लिया व हमारे प्रयोजन को सफल बनाने के लिए पाँच सौ रूपए माँग लिए । मेरे पास दो सौ रूपए ही थे तीन सौ रूपए मित्र से उधारे लेकर पण्डित जी के कर्जे से मुक्त हुए। तुम जैसे लडक़े से कौन लडक़ी लव मैरिज करेगी तुम काम तो कुछ करते नहीं बेरोजगार के बेरोजगार हो कौन लडक़ी अपना बलिदान देगी। हम दोनों मित्र एक दूसरे की तरफ देखने लगे। ये बात तो हमारी समझ में आई ही नहीं। अब ऐसा लग रहा था पण्डित ने हमारे पांच सौ रूपए लेकर हमें लूट लिया। पण्डित जी ने काम करने के साथ-साथ मंदिर जाने की सलाह भी दे डाली।
    दिलवाले फिल्म में अजय देवगन का डायलाँग मैंने अपने अन्दाज में दोहराया - अरे हमें तो अपनी किस्मत ने लूटा अपनों व गैरों में कहाँ दम था मेरे इन्सानियत व मासूमियत प किसी लडक़ी को प्यार न हो सका क्योंकि मेरे पास पैसा कम था। फिर क्या था एक बेरोजगार को राजगार मिलना लव मैरिज के लिए लडक़ी मिलने से भी मुश्किल काम था।
    मैं बहुत ही श्रद्धा के साथ मंदिर जाने लगा घुटनों के बल मुर्तियों के सामने माथा टेकता भगवान तो पता नहीं दूसरे श्रद्धालु मेरी भक्ति देखकर प्रसन्न हो जाते। एक दिन मंदिर के बाहर कुछ आवाजें सुनाई दी। जाकर देखा तो एक लडक़ी की कोई चप्पल चुरा कर ले गया। मैंने नम्रतापूर्व उनसे बातचीत की और अपनी हवाई चप्पन उनको दे दी और कहा मैं रोज मंदिर आता हूँ कल इसी समय वापिस ले आना। अगले दिन वह लडक़ी अपनी भाभी के साथ उसकी भाभी स्वास्थ्य विभाग में नर्स लगी हुई थी। उसकी भाभी ने बातों ही बातों में सारी बातेें पूछ ली। वह थी नर्स लेकिन मुझे डॉक्टर से कम नहीं लगती थी। मैंने भी बातों मे उनका फोन नम्बर ले लिया। फिर क्या था? दूर संचार विभाग ने अपनी भूमिका निभाई और लडक़ी से मेरी लगभग हर रोज बातें होती। ये सब चार महीने चलता रहा। शायद घर वाले भी समझ गए दाल में कुछ काला ही नहीं दाल ही काली है। घर वाले शादी के लिए मुझ पर दबाव डालने लगे। मैंने भी साफ-साफ कह दिया शादी करूंगा तो मंदिर वाली लडक़ी मनीषा से ही करूंगा वरना शादी नहीं करूँगा। हमने घर वालों के खिलाफ चलकर मंदिर में शादी कर ली। फिर घर वालों ने बेटा इकलौते होतेे हुए घुटने टेक दिए और हमको अपना लिया। अब हम तो खुश थे घर वालों का पता नहीं। शुरू में तो श्रीमती पड़ोस वाली सभी महिलाओ के पैर छूती और मेरे भी दिन में एक-दो बार छू ही लेती व सभी के नाम के पीछे जी का इस्तेमाल करती, ऐसा लगता है जैसे मेंने इससे शादी करके कुछ गलती नहीं की। श्रीमती को देखकर मुझे कवि मैथिलीशरण गुप्त की लाईने याद आ जाती एक नहीं दो-दो मात्राएँ नर से बढक़र नारी बस श्रीमती में एक खामी नजर आती। मुझे बेरोजगार होते हुए भी खरीदारी बहुत करती मैं दोस्तों से उधार ले-लेकर थक गया। लगभग दोस्तों ने उधार देना बन्द कर दिया। शादी के तीन महीने ही हुए थे, श्रीमती ने एक नई साडी की फरमाईश कर दी। प्रेमपूर्वक कहा मेरे पास साडी कम ही हैं, उनको कई बार डाल चुकी हूँ। प्लीज ला दीजिए मैं इंकार नहीं कर सका क्योंकि मैंने लव मैरिज की थी। जैसे तैसे करके फरमाईशे पूरी हुई। मैं एक तो बेरोजगार ऊपर से शादी के बाद की महँगाई जिसको सरकार भी नियंत्रण नहीं कर सकती। इस महँगाई में दाल-रोटी खाना तो मुश्किल है। ऊपर से अपने प्यार की गर्माहट को बरकरार रखना और भी मुश्किल लेकिन फिर भी कसमें वादे निभाता चला जा रहा था। कुछ दिन और बीत जाने के बाद श्रीमती ने पड़ोस की महिलाओं के पैरे के साथ-साथ मेरे पैर छूने भी बंद कर दिए। शायद बोर हो गई रोज-रोज उन्ही पैरों को देखकर अब तो मुझै श्रीमती के पैरे छूने की नौबत आ गई कि हे देवी मुझ बेरोजगार पर रहम करना किसी नई फरमाईश का जुल्म मत ढाहना कर्ज का बोझ बढता ही जा रहा है। श्रीमती अपने खर्चो की रफ्तार उसी गति से चला रही थी लेकिन मैं अपना हाथ खींचने लगा फिर क्या था? श्रीमती ने मेरे नाम के पीछे से जी को भी अलविदा कह दिया अब तो श्रीमती मुझे कुछ महँगाई से बढक़र नजर आने लगी श्रीमती को दिल के रास्ते से घर में बसाया-
    महँगाई की तरह जुल्म किए हालत हो गई खस्ता।
    काश पहले पता चल जाता प्यार नहीं इतना सस्ता।।
घर वालों को भी अपनी व्यथा नहीं सुना सकता। क्योंकि मैंने अपनी मर्जी से लव मैरिज की थी। ऐसा लग रहा था। प्यारी ही सब कुछ नहीं अकेले प्यार के सहारे जीवन नहीं बिताया जा सकता प्यार के साथ-साथ जीवन जीने के लिए समाज, परिवार, रिश्तेदार, रोजगार, पैसा जीवन यापन करने वाली सभी वस्तुओं की जरूरत होती है। अन्त में इस बारे में कहना चाहूँगा दोस्तों शादी रचो पर लव मैरिज से बचो।

    मनोज कुमार वंश, जीन्द (हरियाणा)

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